आमी नदी पुल बालूशासन का इतिहास - 1957 में बना ये पुल आज भी तत्कालीन जिला गोरखपुर वर्तमान जिला संत कबीर नगर की शान | Aami Nadi Pul sant kabir nagar
आमी नदी उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण मैदानी नदी है।
1. भौगोलिक जानकारी:
दूसरा नाम: आमी
देश / राज्य: भारत, उत्तर प्रदेश
जिले: सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुर
उद्गम: सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज तहसील में सिकहरा ताल / सोनहरा से
संगम: गोरखपुर जिले के सोहगौरा गांव में राप्ती नदी में मिल जाती है
लंबाई: अलग-अलग सर्वे में 147 किमी से 211 किमी तक बताई जाती है, सरकारी रिकॉर्ड में ज्यादातर 147 किमी। कुछ स्थानीय रिपोर्ट में इसे 102-136 किमी भी कहा गया है।
नदी प्रणाली: गंगा नदी प्रणाली की सहायक, राप्ती की सहायक नदी है ।
2. नाम का अर्थ और इतिहास:
कहा जाता है आमी का मतलब है जिसका पानी आम जैसा मीठा हो। बौद्ध काल में इसका नाम अनोमा नदी था।
किंवदंती है कि इसी नदी को पार करके राजकुमार सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) ने राजसी वस्त्र त्याग कर ज्ञान की खोज शुरू की थी। कोपिया नामक जगह पर अनोमा के किनारे उन्होंने स्नान किया था।
15वीं सदी में संत कबीर ने अपना अंतिम समय मगहर में इसी नदी के किनारे बिताया, यहाँ कबीर और गुरु गोरखनाथ के बीच शास्त्रार्थ भी हुआ था।
कबीर की रचनाओं में भी इस नदी का जिक्र मिलता है।
3. वर्तमान स्थिति - प्रदूषण:
यह नदी लगभग 200 गांवों से होकर गुजरती है और कभी इन गांवों की जीवनदायिनी थी।
1990 के बाद रुदौली, संतकबीरनगर और गोरखपुर के गीडा (गोरखपुर इंडस्ट्रियल एरिया) की फैक्ट्रियों का केमिकल कचरा सीधे नदी में गिरने से यह बहुत प्रदूषित हो गई है।
शोध के अनुसार सिकहरा ताल से बालूशासन तक पानी A-श्रेणी (पीने योग्य) रहता है, लेकिन मगहर तक आते-आते D-श्रेणी और आगे E-श्रेणी से भी नीचे चला जाता है, जो जलीय जीवों के लिए भी अनुपयुक्त है।
इसके चलते खेती, पेयजल और भूगर्भ जल पर भी असर पड़ा है।
4. पुनरुद्धार के प्रयास:
इसे नमामि गंगे योजना में शामिल करने की कवायद चल रही है, ताकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगे और प्रवाह बना रहे।
NGT ने भी सुझाव दिया था कि नदी के किनारे पर बड़े पौधे लगाए जाएं, कैचमेंट एरिया के तालाब-कुएं जीवित रखे जाएं और फैक्ट्रियों का कचरा रोका जाए।
अब उद्गम स्थल सिकहरा ताल के सौंदर्यीकरण और नदी की खुदाई/सफाई का काम शुरू किया गया है। (By meta ai)
प्रांतीय सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित - आमी नदी पुल - 1957 का ऐतिहासिक शिलालेख
आज मुझे त्कालीन गोरखपुर जिले वर्तमान में संत कबीर नगर जनपद बालूशासन स्थित आमी नदी पुल पर लगा एक प्राचीन शिलालेख मिला। ये शिलालेख सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के निर्माण इतिहास का गवाह है।
शिलालेख पर क्या लिखा है - साफ शब्दों में:
प्रांतीय सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा निर्मितआमी नदी पुलकाउत्तर प्रदेश के सार्वजनिक निर्माण विभाग के मंत्रीमाननीय श्री गिरधारी लाल जी नेउद्घाटन कियाश्रावण शुक्ल २ वि.सं. २०१४ - २८ जुलाई १९५७ ई.स.प्ररचन एवं निर्देशन - ब्रिज सर्किल और डिजाइन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेशनिर्माता - श्री नर सिंह दुबे, ग्राम - बिमुटी, जिला - गोरखपुर
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| Khalilabad balushasan |
इस शिलालेख का महत्व क्या है?
1. आमी नदी क्या है?आमी नदी गोरखपुर संत कबीर नगर और सिद्धार्थनगर की जीवनरेखा है। इसे आमी इसलिए कहते हैं क्योंकि कहा जाता है कि इसका पानी पहले बहुत खट्टा (Acidic) होता था। ये राप्ती नदी की सहायक नदी है और गोरखपुर के इतिहास में इसका बहुत महत्व है।
2. 1957 का समय - आज़ादी के सिर्फ 10 साल बाद:28 जुलाई 1957 - मतलब देश आज़ाद हुए सिर्फ 10 साल हुए थे। उस समय उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे का निर्माण जोरों पर था। उस दौर में बना ये पुल आज 68 साल बाद भी मजबूती से खड़ा है, तो सोचिए उस समय के इंजीनियर और ठेकेदार श्री नर सिंह दुबे जी ने कितनी ईमानदारी से काम किया होगा।
3. मंत्री श्री गिरधारी लाल जी कौन थे?1957 में UP के PWD मंत्री रहे श्री गिरधारी लाल जी उस समय के बड़े नेता थे। उनके हाथों से इस पुल का उद्घाटन होना इस बात का सबूत है कि ये पुल उस समय की बड़ी परियोजनाओं में से एक था।
4. ब्रिज सर्किल और डिजाइन - PWD UP:उस समय पुलों का डिजाइन लखनऊ स्थित ब्रिज सर्किल करता था। आज की तरह कंप्यूटर नहीं होते थे, हाथ से नक्शे बनते थे, फिर भी पुल 68 साल से टिका है।
आज की स्थिति:आज आमी नदी पर कई नए पुल बन गए हैं, लेकिन ये पुराना पुल आज भी स्थानीय लोगों के लिए यादगार है। इसकी दीवार पर लगा ये शिलालेख धुंधला पड़ रहा है, बगल में झाड़ियाँ उग आई हैं। हमें चाहिए कि ऐसे ऐतिहासिक धरोहरों को सहेज कर रखा जाए।
अगर आप भी गोरखपुर, खलीलाबाद, मेंहदावल की तरफ जाते हैं तो इस पुल को बालूशासन के पास आयी नदी पर जरूर देखें और इस शिलालेख को पढ़ने की कोशिश करें।
क्या आपके गाँव / जिले में भी ऐसा कोई पुराना शिलालेख है? फोटो भेजिए, हम उसके बारे में पोस्ट बनाएंगे।
लेखक - Lekhpal Vision Team📍 Location: आमी नदी पुल, बालूशासन जिला - संत कबीर नगर
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