UP राजस्व संहिता 2006 धारा 2 - परिभाषाएं (Definitions)
धारा 1 ने बताया कानून क्या है, धारा 2 बताती है इस कानून में लिखे शब्दों का मतलब क्या है। अगर आप धारा 2 नहीं समझे तो पूरी संहिता समझ ही नहीं आएगी।
धारा 2 में 30 से ज्यादा शब्दों की परिभाषा है, लेकिन किसान के लिए 5 सबसे जरूरी हैं -
1. राजस्व ग्राम (Revenue Village) - धारा 2(o)
सरकार ने नक्शे में जिस गांव की सीमा तय कर दी है, वही राजस्व ग्राम है।
*उदाहरण:* समदहा एक राजस्व ग्राम है। इसका अपना नक्शा, अपना खसरा नंबर 1 से शुरू होता है।
2. खातेदार (Tenure Holder) - धारा 2(p)
जिसके नाम खतौनी में जमीन दर्ज है, वही खातेदार है।
*नियमावली कनेक्शन:* नियमावली 2016 के नियम 3 में बताया है खतौनी में खातेदार कैसे लिखा जाएगा।
*उदाहरण:* अगर खतौनी में "राम पुत्र श्याम" लिखा है तो राम ही खातेदार है, उसका भाई नहीं।
3. कृषक (Agriculturist) - धारा 2(c)
जो खुद खेती करता हो। सिर्फ जमीन खरीद लेना कृषक नहीं बनाता।
*प्रैक्टिकल केस:* अगर समदहा का कोई व्यक्ति नौकरी करता है और जमीन बटाई पर देता है, तो वह कानून की नजर में कृषक नहीं माना जाएगा।
4. राजस्व परिषद (Board of Revenue) और तहसीलदार
- *धारा 2(d):* राजस्व परिषद - पूरे UP के राजस्व मामलों का सबसे बड़ा कोर्ट, लखनऊ में।
- *धारा 2(v):* तहसीलदार - तहसील का सबसे बड़ा राजस्व अधिकारी, जो धारा 24, 34, 38 जैसे केस सुनता है।
5. कृषि वर्ष (Agricultural Year)
1 जुलाई से 30 जून तक। सभी वरासत, नामांतरण इसी वर्ष के हिसाब से होते हैं।
आपके काम की बात - क्यों जरूरी है धारा 2?
मान लो आप धारा 34 में वरासत की अर्जी देते हो और लिखते हो "मैं कृषक हूं"। अगर आप नौकरी करते हो तो लेखपाल धारा 2(c) दिखा कर आपकी अर्जी पर आपत्ति लगा देगा।
इसीलिए हर अर्जी से पहले धारा 2 देख लेना चाहिए।
*अगली पोस्ट में:* धारा 3 से 23 - राजस्व परिषद, आयुक्त, कलेक्टर, तहसीलदार के अधिकार - कौन कितना बड़ा अधिकारी है?


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