उत्तर प्रदेश में लेखपाल आंदोलन: अतिरिक्त हल्का छोड़ने से जनजीवन पर कितना असर? 2800 ग्रेड पे और मंडलीय स्थानांतरण की मांग क्यों महत्वपूर्ण है?
विशेष रिपोर्ट | सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश में लेखपाल संवर्ग की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज होता दिखाई दे रहा है। 22 सितंबर 2026 से प्रदेश के कई जिलों में लेखपालों ने अपने अतिरिक्त हल्कों/राजस्व क्षेत्रों का कार्य छोड़कर संबंधित राजस्व निरीक्षक या तहसील कार्यालय में बस्ता जमा करना शुरू किया है।
इस आंदोलन की खास बात यह है कि अधिकांश स्थानों पर लेखपाल अपने मूल हल्के का कार्य करते हुए अतिरिक्त प्रभार वाले हल्कों का काम नहीं कर रहे हैं। लेखपाल संगठनों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं हुआ, इसलिए चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाया गया है।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है—अतिरिक्त हल्का छोड़ने का सीधा प्रभाव उन गांवों के किसानों, विद्यार्थियों, भूमिधरों और आम नागरिकों पर पड़ सकता है, जिनके लिए वही अतिरिक्त हल्का उनका राजस्व क्षेत्र था।
1. अतिरिक्त हल्का छोड़ने का मतलब क्या है?
जब किसी क्षेत्र में लेखपाल का पद रिक्त होता है या किसी अन्य कारण से वहां नियमित लेखपाल उपलब्ध नहीं होता, तो प्रशासन किसी दूसरे लेखपाल को उस क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार दे सकता है।
इस व्यवस्था में एक लेखपाल को अपने मूल क्षेत्र के साथ-साथ दूसरे क्षेत्र का काम भी देखना पड़ता है।
लेखपाल संघ का तर्क है कि लंबे समय तक इस प्रकार अतिरिक्त कार्यभार रहने से एक लेखपाल पर काम का दबाव बढ़ता है और एक वेतन—एक हल्का की व्यवस्था होनी चाहिए। कुछ जिलों की रिपोर्टों में भी संघ ने इसी आधार पर अतिरिक्त प्रभार छोड़ने की बात कही है।
2. अतिरिक्त हल्का छोड़ने से आम जनता को क्या नुकसान हो सकता है?
यह आंदोलन केवल कर्मचारियों और शासन के बीच का विषय नहीं है। इसका प्रभाव राजस्व से जुड़े उन कामों पर पड़ सकता है जिनमें लेखपाल की रिपोर्ट, स्थल निरीक्षण अथवा अभिलेखीय भूमिका होती है।
आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र
कई मामलों में आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में लेखपाल की रिपोर्ट/सत्यापन महत्वपूर्ण होता है।
यदि अतिरिक्त क्षेत्र में संबंधित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती है तो:
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छात्रवृत्ति
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प्रवेश
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सरकारी योजनाओं
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नौकरी/भर्ती से जुड़े दस्तावेज
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आरक्षण संबंधी प्रक्रियाओं
के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त करने में देरी हो सकती है।
प्रयागराज की हालिया रिपोर्ट में 349 अतिरिक्त क्षेत्रों के कार्य बहिष्कार से आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के सत्यापन पर प्रभाव तथा लगभग एक हजार राजस्व गांवों के काम प्रभावित होने की बात कही गई है।
3. किसानों पर सबसे बड़ा प्रभाव किन कामों में पड़ सकता है?
ग्रामीण क्षेत्र में लेखपाल की भूमिका भूमि और राजस्व संबंधी अनेक कार्यों से जुड़ी होती है।
अतिरिक्त हल्का खाली रहने पर निम्न कार्यों में देरी की संभावना बन सकती है:
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वरासत/उत्तराधिकार संबंधी कार्य
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नाम एवं अंश संशोधन
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अंश निर्धारण
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भूमि की पैमाइश
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सीमांकन से जुड़े कार्य
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खतौनी संबंधी कार्य
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भूमि संबंधी स्थलीय सत्यापन
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कृषक दुर्घटना/आपदा संबंधी रिपोर्ट
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किसान रजिस्ट्री से संबंधित कार्य
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आवास अथवा अन्य योजनाओं का स्थलीय सत्यापन
बस्ती की रिपोर्ट में 550 से अधिक गांवों के अतिरिक्त प्रभार वाले क्षेत्रों में आय, जाति, निवास, वरासत, खतौनी, अंश निर्धारण, ईडब्ल्यूएस और अन्य राजस्व कार्य प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।
आगरा में भी अतिरिक्त प्रभार छोड़ने के बाद प्रमाणपत्र, पैमाइश और विरासत जैसे कार्य प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है।
4. किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या क्या हो सकती है?
किसान के लिए जमीन से संबंधित कोई छोटा-सा काम भी कई बार आगे की प्रक्रिया से जुड़ा होता है।
उदाहरण के लिए यदि किसी किसान को:
अंश निर्धारण → खतौनी संशोधन → बैंक/ऋण → सरकारी योजना
के लिए दस्तावेज चाहिए और बीच में राजस्व सत्यापन लंबित हो जाता है, तो पूरा काम आगे खिसक सकता है।
इसी प्रकार वरासत का मामला लंबित होने पर मृतक खातेदार के उत्तराधिकारियों के नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज होने में देरी हो सकती है।
इसलिए आंदोलन का प्रभाव केवल तहसील कार्यालय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर गांव के स्तर पर दिखाई दे सकता है।
5. विद्यार्थियों और युवाओं पर प्रभाव
आय और जाति प्रमाणपत्र की आवश्यकता विद्यार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले युवाओं को भी पड़ती है।
यदि प्रमाणपत्र समय पर उपलब्ध नहीं होता तो:
छात्रवृत्ति → प्रवेश → आरक्षण → भर्ती प्रक्रिया
जैसे मामलों में कठिनाई पैदा हो सकती है।
अयोध्या क्षेत्र की रिपोर्ट में भी अतिरिक्त राजस्व गांवों के कार्य बहिष्कार से आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के सत्यापन सहित अन्य कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।
6. क्या आंदोलन का मतलब सभी राजस्व कार्य बंद होना है?
वर्तमान चरण में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर स्थिति यह है कि लेखपाल अपने मूल तैनाती वाले हल्के में कार्य कर रहे हैं, जबकि अतिरिक्त प्रभार वाले क्षेत्रों का काम नहीं कर रहे हैं।
इस अंतर को समझना जरूरी है।
अर्थात यह कहना सही नहीं होगा कि प्रदेश के प्रत्येक स्थान पर लेखपालों ने सभी सरकारी काम पूरी तरह बंद कर दिए हैं।
हालांकि कुछ संगठनों/इकाइयों ने आगे चलकर ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार सहित आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी भी दी है।
7. लेखपालों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
वर्तमान आंदोलन से संबंधित प्रकाशित ज्ञापनों और रिपोर्टों में कई मांगें सामने आई हैं। इनमें प्रमुख हैं:
① प्रारंभिक वेतनमान में 2800 ग्रेड पे
लेखपाल संघ की प्रमुख मांग प्रारंभिक वेतनमान को ग्रेड पे 2800 के अनुरूप करने तथा संबंधित वेतन विसंगति दूर करने की है।
संघ का तर्क है कि वर्तमान वेतन संरचना और कार्य की प्रकृति के बीच विसंगति को दूर किया जाना चाहिए।
यह मांग हालिया कई जिला स्तरीय ज्ञापनों और रिपोर्टों में प्रमुखता से दर्ज है।
② अंतरमंडलीय/मंडलीय स्थानांतरण
दूसरी प्रमुख मांग अंतरमंडलीय स्थानांतरण की ऑनलाइन प्रक्रिया/पोर्टल दोबारा खोलने की है।
संघ की ओर से यह तर्क रखा गया है कि अनेक लेखपाल अपने गृह जनपद या गृह मंडल से काफी दूर तैनात हैं।
एक हालिया रिपोर्ट में संघ ने लगभग 2,700 लेखपालों के दूरस्थ तैनाती से राहत के लिए स्थानांतरण पोर्टल पुनः खोलने की मांग का उल्लेख किया है।
③ लंबित पदोन्नति
चयन वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची जारी करने की मांग भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
④ विभागीय परीक्षा के परिणाम
2024 में नियुक्त लेखपालों की विभागीय परीक्षा के परिणाम और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जारी करने की मांग भी उठाई गई है।
⑤ भत्तों में वृद्धि
संघ की मांगों में स्टेशनरी, वाहन/यात्रा और विशेष भत्तों में वृद्धि भी शामिल है। विभिन्न ज्ञापनों में अलग-अलग प्रस्तावित राशि का उल्लेख किया गया है।
⑥ लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित करना
लेखपालों का कार्य अब बड़ी मात्रा में ऑनलाइन पोर्टल, डिजिटल भूमि अभिलेख, मोबाइल आधारित सर्वे, किसान संबंधी डिजिटल कार्य और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़ा है।
इसी आधार पर संघ की ओर से लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित करने तथा लैपटॉप/मोबाइल जैसे संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
⑦ ग्राम सचिवालय में मूलभूत सुविधाएं
कुछ ज्ञापनों में ग्राम सचिवालयों में सुरक्षित स्थान, इंटरनेट, बिजली, पानी, शौचालय और आवश्यक कार्यालय सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है।
8. क्या आंदोलन को और प्रभावी बनाया जा सकता है?
यदि लेखपाल संगठन अपनी मांगों को मजबूत तरीके से शासन तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आंदोलन को अनुशासित, शांतिपूर्ण, तथ्य आधारित और जनहित को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाना उपयोगी हो सकता है।
पहला तरीका: मांगों का स्पष्ट प्राथमिकता क्रम
सभी मांगों को एक साथ रखने के बजाय उन्हें तीन श्रेणियों में स्पष्ट किया जा सकता है:
तत्काल मांगें
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2800 ग्रेड पे/वेतन विसंगति पर निर्णय
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अंतरमंडलीय स्थानांतरण पोर्टल
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लंबित पदोन्नति सूची
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विभागीय परीक्षा परिणाम
सेवा-सुविधा संबंधी मांगें
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वाहन/यात्रा भत्ता
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स्टेशनरी भत्ता
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विशेष भत्ता
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डिजिटल उपकरण
दीर्घकालिक सुधार
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तकनीकी संवर्ग
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एक वेतन–एक हल्का
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रिक्त पदों को भरना
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कार्यभार का वैज्ञानिक निर्धारण
इससे शासन के सामने मांगों की प्राथमिकता अधिक स्पष्ट होगी।




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